शराब का था आदि, परिवार की हुयी बर्बादी.. परमात्मा एक
▶माझा सत्य अनुभव▶
【शराब का था आदि, परिवार की हुयी बर्बादी】
मेरे मार्ग मे आने का कारण इस प्रकार है जो अपने शब्दों द्वारा मानवधर्म एकता परिवार ईस भगवतकार्य के गृप के माध्यमद्वारा आप सभी सेवक दादा व ताई के सामने व्यक्त करने जा रहा हूँ। वैसे तो इस मार्ग में जो भी मनुष्य आता है वह दुखी-कष्टी जीवन से त्रस्त रहता है और उसे इस मार्ग मे एक नई दिशा प्रदान होती है। मैं भी जिंदगी से और अपने अाप से त्रस्त होगया था। मुझे इस मार्ग मे आकर एक नया जीवन मिला है तो वह महानत्यागी बाबा जुमदेवजी की कृपा है।
मैं गरीब परिवार में पैदा हुआ हु। मैंने अपनी आँखों से देखा है और जाना है कि गरिबी क्या होती है। मैंने १२वी करने के पश्चात आई. टी.आई. में
वेल्डर यह ट्रेड किया और उसके बाद किसी कंपनी में नौकरी हेतु बहुत कोशिश करने लगा लेकिन मुझे कही भी नौकरी नहीं मिली। मैं हर तरफ से परेशान हो गया, फिर एक वर्कशाप में काम करने लगा। जैसे-तैसे जिंदगी का गुजारा होने लगा।
मेरे पिताजी को लकवा हो गया था और माँ बिडी बनाती थी। मैंने धीरे धीरे ट्रक बाड़ी का काम चालू किया और काम ठेके पर लेने लगा। मैं उस समय कभी-कभी शराब पी लेता था, लेकिन घर पर मालुम नहीं होने देता था। फिर मैंने पिताजी की पसंद की लड़की से शादी की और मेरा जीवन अच्छी तरह चलने लगा। फिर इस मोटर वाहन के काम में मेरी शराब पीने की आदत कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी। ऐसे में मेरे पिताजी का देहांत हो गया और मेरे उपर परिवार की जिम्मेदारी आ पडी।
मेरे परिवार में माँ, एक छोटा भाई, एक बहन, मेरी पत्नी और मैं गुजर बसर करने लगे। मैं शनिवार का उपवास करता था और सभी देवी-देवताओं की पुजा करता था। हनुमान चालीसा पढ़ता था, फिर भी शराब पिता था। कुछ दिन के बाद भाई-बहन की शादी की जिम्मेदारी मुझपर आई। जैसे-तैसे भाई व बहन की शादी करवाया। शादी में कर्ज हो गया। मेरे भाई को भी मैं अपने साथ काम पर लाता था ताकि वह भी यह काम सिखकर बड़ा मिस्ञी बन जाए। फिर हमारा काम अच्छा चलने लगा, मेरे पास मेरे भाई के सिवाय और ४ मिस्त्री काम करते थे। लेकिन ठेकेदारी का काम कभी चले तो कभी नहीं चले। मेरे उपर इतनी परेशानी आई कि मैं बुरी तरह कर्ज में फँस गया और मेरे शराब पीने की आदत दिन ब दिन बढ़ रही थी। मेरी शराब पीने का फायदा लोग उठाने लगे। मैं शराब का इतना आदि हो गया कि रिश्तेदार मुझे अपने पास आता देखकर मुझसे दूर जाने लगे। मुझे सब समझ में आता था, क्योकि मुझे शराब पीने के बाद चढ़ती नहीं थी। सिर्फ शराब की गंध से ही मुझे पहचान सकते थे कि यह शराब पिया हुआ है। नहीं तो कोई पहचान नहीं सकता था।
मेरी शराब की लत के कारण मेरे परिवार के सभी सदस्य परेशान हो गए थे। मैं अपने गम में डुबा रहता था और शराब का इतना आदि हो चूका था कि, जब मैं सोने की कोशिश करता तो मुझे नींद ही नहीं आती थी तो मैं शराब की बोतल अपने खाट के पास रखता था और पिता था। कहने का मतलब २४ घंटे मैं शराब के नशे में रहता था। शराब की वजह से मैं अपने बच्चे एंव परिवार का ध्यान नही रख पा रहा था। घर का कमाने वाला अगर शराबी बन जाता है तो उस घर की हालत क्या होगी यह आप भलीभाँति जानते है।
फिर मेरी पत्नी ने मुझे "बाहेकर व्यसन मुक्ति केंद्र" में १ महीने तक रखा ताकि मेरी शराब छुट जाए। लेकिन मेरी पत्नी की कोशिश भी नाकाम रही और वहां से आने के बाद कुछ दिन तक तो मैंने शराब नहीं पी क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं रहते थे। फिर भी मै कही न कही से शराब पीने के लिए पै्से प्राप्त कर ही लेता था।
मेरा साथी गेंदलाल मानकर यह मेरे साथ अक्सर शराब पिता था। लेकिन कुछ दिन के बाद मार्ग मे आया और मुझसे दूर हुआ। मेरा मित्र मधु पटले भी मेरे साथ शराब पिता था लेकिन वह भी मार्ग मे आया और उसकी गृहस्थी सुधर गई। ये लोग मुझे अक्सर कहते थे कि मार्ग मे आजा लेकिन मैं इनकी सुनता नहीं था।
मैंने पैसा बहुत कमाया लेकिन सभी शराब में गवाया। मेरी पत्नी की कोशिश थी कि मेरा पति शराब पिना छोड़ दे। मेरी पत्नी ने बहुत उपाय किए कुडवा गाँव में एक साई स्थान में ले गई लेकिन वहाँ भी कुछ नहीं हुआ। मेरा एक जमाई भी पहले मेरे साथ शराब पिता था लेकिन वह कब मार्ग मे आया यह मालूम ही नहीं पडा और अब वो भी खुशहाली से जी रहे थे।
मेरे काम का पैसा भी लोग देते नहीं थे। मैं परेशान हो गया और १ साल तक खाली घुमने लगा, मेरा काम करने में दिमाग ही नहीं लगता था। मेरा भाई जो हफ्ते के पैसे लाता उसी में घर चलता था। मैं शराब पीने के शिवाय कुछ भी नहीं करता था। इस वजह से बहुत ताने सहन करने पड़ते थे। जब मेरे पास पैसे रहते थे तो रिश्तेदार भी अच्छे बोलते थे, लेकिन मेरी इस हालत पे मुझे किसी ने साथ नहीं दिया।
एक समय की बात है मेरा पुरा परिवार मेरे मामा की लड़की की शादी में गए। मैं भी अपनी पत्नी के साथ गया। वहां पर मुझे सब अलग ही निगाह से देखते थे और मान सम्मान कुछ नहीं करते थे। उलटे ताने कसते थे, यह सब देखकर मेरी पत्नी रोने के शिवाय और कर भी क्या सकती थी। उसे एहसास होता था कि आज मेरे पति की यह हालत है तो यह रिश्तेदार कद्र नहीं कर रहे, लेकिन एक वक्त था कि मेरा पति सबको आदर देकर इनका मान सम्मान करता था। फिर यह बेईजती देखकर मैं बहुत रोया और अपनी पत्नी को लेकर गोंदिया आ गया। फिर अपनी पत्नी को बोला की, आज के बाद मै सिर्फ अपने बच्चे और तेरे लिए जीऊंगा।
हमारे गोंदिया आने के बाद घर पर कुछ भी नहीं था खाने का सामान नहीं था। मैंने कैसे भी करके खाने का इंतजाम किया और मैं ठेकेदार होकर भी ५० रूपये रोज से वेल्डींग का काम करने लगा। इस तरह पत्नी व बच्चे का पालन पोषण करने लगा। मैंने रात में मेरी पारिवारिक परिस्थिति पर बहुत विचार किया और यह सब देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए।
दुसरे दिन मैं पत्नी को बिना बताए सेवक गेंदलाल मानकर से मिला और बोला
मामा मैं परमात्मा एक मार्ग में आना चाहता हूँ, तो इसके लिए मुझे क्या करना पड़ेगा। फिर दूसरे दिन मानकरजी ने कार्यकर्ता श्री. शोभेलालजी कुशराम के पास ले गए और कार्यकर्ता जी ने मुझे इस मार्ग की रुपरेशा बताकर एंव मार्ग के नियम समझा कर परिवार सहित आने को कहा। यह समझकर मै घर पर आया और पत्नी को बताया कि मुझे परमात्मा एक मार्ग मे जाना है तो मेरी पत्नी को यकीन ही नहीं हुआ। फिर मेरे साथ काम करने वाले को बोला कि आज जितनी दारू पिना है तो पी लो कल से मैं दारू नहीं पिऊंगा ना पिलाऊंगा। इतना बोलकर मैं उनके साथ आखिरी बार जमके दारू पिया। उस दिन मैंने इतनी शराब पिया की, मैं घर पर किस प्रकार आया यह मुझे मालूम ही नहीं पडा। घर पर मेरी माँ,भाई व बहु गाँव से आ चुके थे। फिर नशे की हालत में ही मैंने सबको बोला कि मुझे यह मार्ग लेना है तो आप लोगों को मेरे साथ कल सुबह कार्यकर्ता जी के घर पर चलना पड़ेगा। लेकिन मेरी माँ व भाई तैयार नही हुए। मेरी माँ व भाई अपने कुल देवी-देवताओं का विसर्जन करने को तैयार नहीं थे। अब मेरे सामने बड़ी बिकट समस्या आ गई। क्योंकि मैंने कार्यकर्ताजी को शब्द दिया था। फिर मैंने सुबह कार्यकर्ताजी के घर जाकर उनको बताया कि मेरे घर के लोग इस मार्ग मे आने के लिए तैयार नहीं है और मुझे तो बाबा की शरण में आना है। तब कार्यकर्ताजी ने बोले कि आपको कार्य करना है तो आप पति-पत्नी घर से अलग रहकर कार्य शुरू कर सकते है। फिर मैंने विचार किया कि यह सही रहेगा और पत्नी व बच्चे के जीवन के लिए मैंने पक्का इरादा किया और घर पर आकर बोला आप इस मार्ग मे नहीं आते है तो कोई बात नहीं लेकिन मुझे मार्ग स्वीकार करना है और बाबा के कार्य करना है उसके लिए हमें अलग अलग रहना पड़ेगा। तो सबने कहा ठीक है। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि कल सुबह कार्यकर्ताजी के पास जाकर हम कार्य लेंगे और मै पत्नी को लेकर कार्यकर्ताजी के निवास स्थान पर गया। कार्यकर्ताजी ने मरने का वचन माँगा, तब मैं बोला मै तो वैसे भी मरा हूँ, एक भगवान के पास मरूंगा तो अच्छा है और हमने कार्यकर्ताजी के कहे अनुसार भगवन को वचन दिया कि, मैं मरूंगा या जिऊंगा एक ही भगवान बाबा हनुमानजी को मानूंगा। मैंने कर्म करने में गलती की उसकी मुझे क्षमा करे। बाबा के आदेश सत्य, मर्यादा, प्रेम का जीवन में पालन करूँगा। एेसा मैं सत्य वचन देता हूँ, इसे जीवन के अंत समय नही भूलूंगा। इतना कहकर हमे कार्यकर्ताजी ने ७ दिन के कार्य दिए। वह तारीख थी
२२/०५/२००३ और हमने उस दिन हमने मार्ग में प्रवेश किया। परमेश्वरी कार्य एंव नियमो का पालन करने से हमें सुख समृद्धि मिलने लगी। मेरा काम भी अच्छा चलने लगा फिर से मैंने अपना ठेकेदारी का काम शुरू किया और धीरे-धीरे ट्रक बाड़ी का काम मेरा अच्छा चलने लगा। मेरा जो नाम मार्केट से लुप्त होगया था वह नाम बाबा हनुमानजी व महानत्यागी बाबा जुमदेवजी की कृपा से वापस मिला। आज मैंने
"परमात्मा एक ट्रक बॉड़ी वर्क्स" के नाम से अपनी गैरेज शुरू की और वह अच्छी चल रही है। आज मार्केट में मुझे कुथे मिस्ञी के नाम से जानते हैं। फिर उसके पश्चात मैंने ४२ दिन का त्याग करके ९ हवन कार्य किया।
यह सब कृपा भगवान बाबा हनुमानजी व महानत्यागी बाबा जुमदेवजी की है जिससे मुझे मानवता की सिख मिली और मानव के उद्देश्य क्या है यह मुझे इस मानव धर्म से ही ज्ञात हुआ। अगर मैं यह मार्ग स्वीकार नहीं करता तो शायद मै आज इस धरती पर जिंदा नही होता। हमारे सदगुरू महानत्यागी बाबा जुमदेवजी की कृपा है कि मैं अपना जीवन सफल कर पाया। धन्य हैं भगवान बाबा हनुमानजी व महान त्यागी बाबा जुमदेवजी इन्हें मेरा कोटि-कोटि प्रणाम। मैं अपने शब्दों को यही विराम देता हूँ।
लिखने में कुछ गलती हुई हो तो "भगवान बाबा हनुमानजी" व "महानत्यागी बाबा जुमदेवजी" मुझे माफ करें।
नमस्कार जी सभीको|
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परमात्मा एक सेवक,
ओमप्रकाश सीतारामजी कुथे
शाखा:- गोंदिया
परमपुज्य परमात्मा एक सेवक मंडळ, वर्धमान नगर, नागपुर
सेवक नंबर:- २११०८
मार्गदर्शक:- श्री. शोभेलालजी कुशराम
संजय नगर गोंदिया
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[ टिप :- वरिल अनुभव कुणीही काँपी करु नये, त्यापेक्षा जास्तीत जास्त शेअर करावा.]
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गणेश दादा बिडकर:-👉९७६६५७३४१०
गजानन दादा लेन्डे :👉 ९८५०६७५७६६
मोहन दादा आस्वले:-👉९७६४९८९८८३
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🔴सौजन्य🔴
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"अँडमिन,सेवक, सेविका",
मानवधर्म एकता परिवार,
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युवा आणि जेष्ठ सेवकांचा समुह,
प.पु.परमात्मा एक सेवक मंडळ,वर्धमाननगर,नागपुर.
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