PARMATMA EK- महानत्यागी बाबा जुमदेवजी संदेश

 

 PARMATMA EK- महानत्यागी बाबा जुमदेवजी  संदेश


PARMATMA EK- महानत्यागी बाबा जुमदेवजी  संदेश
PARMATMA EK- महानत्यागी बाबा जुमदेवजी  संदेश


          महानत्यागी बाबा जुमदेवजी यांच्या निवासस्थानी, भगवतकृपा प्राप्तीनंतर प्रत्येक शनिवारी बैठक होत होती. निराकार बैठकीत बाबा देहभान अवस्थेत राहत होते. त्यावेळेस त्यांनी केलेल्या मागदर्शनातुन सेवकांना संदेश मिळत होते. त्यांतील काही ठळक संदेश या उताऱ्यांत दिले आहेत.


दि. २०/११/१९७१-

इस मार्ग के तत्वपर चलना है। पुराने तत्व बदल देना चाहिये। गलत चलनेकी भुमिका छोड देना चाहिये। बुरे विचार बंद करना चाहिये। अनेक व्यसन बंद करके भगवत् कृपा करो हृदय में रखकर सत्य, मर्यादा, प्रेम से रहकर जीवन को उठाये सत्य भुमिका का भय नही मानना चाहिये।


दि. २७/११/१९७१-

घरवाले सुन लो। घरवालो ने बाबा से झूठ बोल कर कुछ भी चाहिये। सेवक के (बाबा) शब्द भगवत के शब्द, सेवक की मर्जी भगवत् की मर्जी है हर छुपाना नही सेवक और बाईने बाबा को हृदय में रखकर कदम डालना चाहिये। जो सेवक सही कदम डालेगा वह बाबा का भाई होगा। अन्यथा उसका बाबा से कोई संबंध नहीं। सुख शांती चाहिये तो मानव बनो, बुध्दिमान बनो। श्रम से जीवो। बच्चो को बुध्दिमान बनाओ। बाबा के आदेश का पालन करना चाहिये।


दि.०४/१२/१९७१

भगवत् कृपा महानशक्ती है। भगवान को आकार में नही बना सकते। उसे तत्व विश्वास और त्याग से बना सकते है। त्याग धैर्य बनेगा। निश्चय से विश्वास बनेगा। भगवान ने आत्मा से निर्जीव वस्तु को सजीव बनाया देशपर बहुत बडी आपत्ती है।

इसलिये हमे वहाँ जाना है। हम चलते है।

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